वाराणसी। तुलसीघाट स्थित ध्रुपद तीर्थ पर महाराज विद्या मंदिर न्यास के तत्ववधान में आयोजित 50वां स्वर्ण जयंती वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय ध्रुपद मेला की तीसरी निशा में देश-विदेश के ख्याति प्राप्त कला साधकों ने अपनी प्रस्तुति से मेले का अविस्मरणीय ऊंचाई प्रदान कर दिया। प्राचीन विद्या को इस कला साधकों ने अपनी तपस्या से एक ऐसा स्थान दिलाया कि अब यह विद्या प्राचीन नहीं रही। आज कलाकारों के साथ श्रोताओं की एसी कड़ी बन गयी है कि जो दर्शाती है कि ध्रुपद मेला सफलता की अग्रसर हो चुका है।

सांगीतिक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ जापान से पधारी मोमको मियूरा के गायन से। आपने राग रोगेश्री में आलापचारी के पश्चात चौताल व सूलताल के दो बंदिशों से गायन को रिाम दिया। आपका गायन प्रभावी रहा। आपके साथ शोभन बनर्जी ने पखावज पर सहभागिता किया। दूसरी प्रस्तुतियों में दिल्ली से पधारी शिल्पा शंकर नारायण ने सर्वप्रथम राग यमन में आलापचारी के पश्चात चौताल सूलताल निबद्ध बंदिश से प्रथम अध्याय को विराम देकर, राग काम्बोजी में एक बंदिश पखावज पर अंकित पारिख ने सूझबूझ से संगत किया। अगली प्रस्तुति में इन्दौर से पधारे पं. हरिरायजी गोस्वामी व पं. बागधीश जी गोस्वामी ने युगल पखावज वादन प्रस्तुत किया। आप लोगं ने पहले ताल बसन्त में कई परने, टुकड़ा बजाकर प्रथम अध्याय को विराम देकर चौताल में वादन कर प्रस्तुति को विराम दिया। आपके साथ गौरी बनर्जी ने सारंगी व मोहित मेहता ने बांसुरी पर साथ दिया।

अगली प्रस्तुति में काठमांडू के के.सी. ने राग भूपाली में पहले चौताल निबद्ध ध्रुपद तथा सूलताल में एक बंदिश से गायन को विराम दिया। आपके साथ आदिल दीप ने पखावज पर अच्छी भागीदारी निभायी। गायन के क्रम में विख्यात गायन उस्ताद नफीसद्दीन डागर, अनीसुउ्दीन डागर ने राग मालकौस में ध्रुपद व सूलताल में गायन कर प्रस्तुति को विराम दिया। आपके साथ पखावज पर मोहन श्याम शर्मा ने अच्छी भागीदारी निभायी। इसी क्रम में प्रशान्त-निशान्त मलिक, सुप्रियों मोइत्रा, रंजिता मुखर्जी, मधुछन्दा दत्ता व चिन्तामणि ने ध्रुपद गायन कर श्रोताओ को रस सिक्त कर दिया। वहीं वादन के क्रम में श्याम रस्तोगी (सुरबहार), जयदीप मुखर्जी (मोहनवीणा), राजकुमार झा (स्वतंत्र पखावज) वादन कर ध्रुपद तीर्थ को गुंजायमान किया। गायन में सुलभा सर्राफ ने एक अलग छाप छोड़ा। इस प्रकार सम्पन्न हुआ तीसरी निशा।

महाराज अनन्त नारायण सिंह नेे दिया 2024 का पुरस्कार
गायन में नायक चन्द्र बड़ाल, के.सी. को स्वाति तीरूनाल एवार्ड, शशिकान्त पाठक को विभूति नारायण सिंह एवार्ड, पं. राजखुशी राम, पद्मश्री राजेश्वर आचार्य, पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल को लाइफ टाइम एचिवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण करते समय महाराज अनन्त नारायण सिंह ने घोषणा की कि ध्रुपद मेला अगले वर्ष से पांच दिन का होगा।
