वाराणसी, सन्मार्ग। महाराज विद्या मंदिर न्यास के तत्वावधान में तुलसीघाट स्थित ध्रुपद तीर्थ पर आयोजित 50वां अंतर्राष्ट्रीय ध्रुपद मेला की चौथी निशा में कलाकारों से लेकर श्रोतागण एक अलग मिजाज में दिखे। कारण था महाशिवरात्रि। हर कोई ेक अलग रंग में स्वरों का आनंद ले रहे थे, तालों पर झूम रहे थे, मुक्त रूप से विचरण कर रहे ते। यहां तक की विदेशी श्रोताओं को ताल के साथ नृत्य करते भी देखा गया। यही ही बनारस, यही है ध्रुपद मेला की खासियत, और इसलिए आज यह पूरे विश्व में एक अलग पहचान बना चुकी है।कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ आशुतोष भट्टाचार्य के गायन से। इन्होंने राग विहाग में आलापचारी के पश्चात चौताल निबद्ध बंदिश से गायन के प्रथम अध्याय को विराम दिया। इन्होंने सूलताल में एक बंदिश से प्रस्तुति को पूर्ण विराम दिया। इनके साथ आदित्यदीप ने पखावज पर साथ दिया। अगली प्रस्तुति में दिल्ली के वरिष्ठ पखावज वादक पं. डालचंद्र शर्मा ने अपने शिष्य मिथुन चक्रवर्ती को लेकर स्वतंत्र वादन किया। इन्होंने चौताल में कई परने, टुकडों में वादन से प्रस्तुति को सजाया। वादन विद्वतापूर्ण रही। इनके साथ मिथुन चक्रवर्ती ने अच्च्छा साथ निभाया। इनके साथ सारंगी पर गौरी बनर्जी ने सहभागिता निभायी। इसी क्रम में विख्यात गायक पं. उदय मवालकर ने गायन के क्रम में राग झिंझोरी में आलापचारी के पश्चात धमार निबद्द्ध बंदिश से गायन को अल्प विराम दिया। इसके पश्चात आपने राग शिवरंजनी में एक बंदिश से गायन को विराम दिया। इनके साथ पखावज पर आदित्यदीप ने समझदारी के साथ संगत किया। इसके पश्चात अभय सोपोरी का संतूर वादन प्रस्तुत हुआ। इन्होंने संतूर पर राग गाती की अवतारणा की। सर्वप्रथम ध्रपद अंग में आलापचारी में मंद-अतिमंद्र स्वरों का गमक अविस्मरणीय रहा। इन्होंने चौताल में गतकारी से वादन को विराम दिया। इनके साथ श्रीषशंकर उपाध्याय ने पखावज पर खूबसूरत साथ दिया।
इसके पश्चात प्रख्यात गायक उस्ताद वासिफउद्दीन डागर ने राग दरबारी कान्हडा में ध्रुपद प्रस्तुत किया। अंत में सूलताल में एक बंदिश गाया।
मोहन श्याम शर्मा ने पखावज पर साथ दिया। इसके पश्चात डा. सुप्रियो मुखर्जी (विचित्रवीणा), पं. चेतन जोशी (बांसुरी), पं. प्रभात कुमार (सरोद) ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में पं. प्रेमकुमार मलिक, असित राय, जगन्नाथ दासगुप्ता, आशीष जायसवाल का गायन से स्वर्ण जयंती वर्ष का समापन हुआ। अगले वर्ष 22 फरवरी से 26 फरवरी तक ध्रुपद मेले का तिथि निर्धारित हुआ।