रोपवे के पहले सेक्शन का कैंट, भारत माता मंदिर और रथयात्रा में प्लेटफाॅर्म का काम अंतिम चरण में है। काशी विद्यापीठ और रथयात्रा के रोपवे स्टेशन में गंडोला के लिए प्लेटफॉर्म स्तर तक का काम हो गया है। दोनों स्टेशनों के बीच 8 टावर होंगे। स्टेशनों पर काशी की संस्कृति, खानपान, अध्यात्म, इतिहास और बनारस से जुड़़ी चीजें दिखाई देंगी।

वाराणसी।दुनिया का तीसरा और देश का पहला अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे का निर्माण काशी में तेजी से चल रहा है। 807 करोड़ रुपये से बनने वाले रोपवे में यात्रा करने वाले यात्री केवल हैंडबैग और छोटे बैग ही ले जा सकेंगे। इसके लिए एक मैकनिज्म तैयार किया जा रहा है।नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार कैंट स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों के लिए लॉकर की व्यवस्था होगी। ताकि वे अपना सामान वहां रखकर रोपवे की यात्रा कर सकें। इस दौरान केवल छोटे हैंड बैग, लैपटॉप, महिलाओं के पर्स आदि को ही ले जाने की इजाजत दी जाएगी।

रोपवे के गंडोला की निर्धारित क्षमता होती है। एक व्यक्ति का सामान्य वजन 60 से 80 किलो के बीच होता है। इसके अनुसार 10 सीटर गंडोला की क्षमता 600 से 800 किलो वजन उठाने की है। इससे अधिक वजन होने पर रोपवे के टूटने का खतरा होता है। इसी हिसाब से वजन तय होगा।जून जुलाई में होने वाले ट्रायल रन के दौरान वजन को लेकर भी रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि राजगीर में आठ सीटर रोपवे में 640 किलो तक का वजन ले जाने की सुविधा है। इसमें आदमी और सामान दोनों का वजन शामिल है। इससे अधिक वजन नहीं रखा जाता है।रोपवे के लिए स्विटजरलैंड और ऑस्ट्रिया से उपकरण आ रहे हैं। जो सोलर पैनल से चलेंगे। गंडोला सीट फोल्ड हो सकेगी। जिससे दिव्यांगजनों की व्हीलचेयर ले जाने में आसानी होगी। रोपवे काशी की यातायात की समस्या को सुगम बनाने के साथ ही कम समय में प्रदूषण रहित यात्रा कराएगा।

150 गंडोला में 6000 यात्री कर सकेंगे प्रति घंटे यात्रा
कैंट स्टेशन से गोदौलिया की 3.85 किलोमीटर की यात्रा केवल 16 मिनट में तय होगी। गंडोला करीब 50 मीटर की ऊंचाई पर चलेगा। हर डेढ़ से दो मिनट के अंतराल में यात्रियों को गंडोला उपलब्ध रहेगा। एक दिशा में एक घंटे में 3000 लोग यात्रा कर सकेंगे। दोनों दिशाओं से 6000 लोग एक घंटे में आ जा सकेंगे। 150 गंडोला चलाई जाएगी।

रोप वे का काम तेजी से चल रहा है। काशी की परंपरा की झलक गंडोला में दिखेगी। सुरक्षा को ध्यान में रखकर गंडोला में निर्धारित वजन तय किया जाएगा। इसका मैकनिज्म तैयार किया जा रहा है। – पुलकित गर्ग, उपाध्यक्ष वीडीए

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