वाराणसी, सन्मार्ग। गर्मी तपीश के मौसम में भोजन से अधिक जल की आवश्यक्ता होती है पानी के वगैर रहना मुश्किल है।काशी व्यापार के साथ धर्म की भी नगरी है यहा पर प्रतिदिन हजारों की तादात में यात्रियो व्यापारियों का आगमन होता है। जिनका अपना कोई पहचान नही होता है पं्रचंड तपन व गर्मी उनकों जल की आवश्यता होती है तो वह चल रहे रास्ते के अगल बगल हैंडपम्प या पानी की उपलब्धता देखने लगते है उनको दूर-दूर नजर नही आता है।

यात्रियों व राहगिरों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शहर के धर्मालबियों व समाजसेवी व्यापारियों द्वारा शहर में खास कर चौक से गोदौलिया के बीच पौसरा चलाया जाता रहा।एक व्यक्ति बैठकर लोगों गुड या बताशा देकर घडे व नाद मे ंढककर रखे ठडे जल को पिलाता था।वाराणसी मेे आम जनमानस को शुद्ध पेयजल उपलथ्ध कराने के लिए पहले सडक के किनारे व गलियों में हैण्डपाईप रहते थे,लोग अपने घर के आगे नल लगवा देते है जहा आकर लोग अपनी प्यास बुझाते थे।मौजुदा समय में उस तरह का एक भी पौसरा नही चल रहा है न ही व्यवस्था है।काशी में बढती आधुनिकता के दौर में परंपरा लुप्त हो गई सडक पर कही पौसरा नही दिख रहा है।

जिससे आने जाने वाले राहगिरों,यात्रियों को तपीश भरी गर्मी के मौसम में पेयजल की भारी दिक्कत हो रही ।आधुनिकता बढने के साथ बोतल का पानी लोग पीने लगे है समाज का हर आदमी बोतल का पानी पीने के लिए सक्षम नही है उन लोगों को हैडपंप व पौसरे का आसरा रहता है।नगर निगम द्वारा शहर के राहगिरों व यात्रियों के पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सिगरा शहीद उद्यान के आगे,गुलाब बाग,रामकटोरा चौराहा, कचहरी बनारस क्लब, तेलियाबाग, मच्छोदरी पार्क, गिरजाघर उद्यम सिंह आईलैंड, पाण्डेयपुर हनुमान मंदिर के पास,श्रीनगर पार्क, शिवाला स्थित रत्नाकर पार्क, दुर्गाकुंड आनंद पार्क के पास एक घडे में जल व प्लास्टिक का मग रखकर प्याउ संचालित किया जा रहा है।

सभी स्थानों पर पानी पिलाने के लिए एक कर्मचारी कों तैनात किया गया है। प्याउ स्थल पर धुप आ जाने के कारण कर्मचारी वहा मौजुद नही रह पाते है उससे बचाव के लिए छाये में चले जाते है। नगर आयुक्त अक्षत कुमार द्वारा आम जनमानस को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अपने स्तर से प्रयास किया जा रहा है।

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