संकटमोचन संगीत समारोह का ही एक हिस्सा कला वीथिका है, जिसमें हनुमत प्रभु के विविध रूपों की तस्वीरें लगाई गई हैं। इस बार हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन मिल रहे हैं। यह कला प्रदर्शनी भी दो मई तक चलेगी।
वाराणसी। एक तरफ नाद ब्रह्म की उपासना तो दूसरी ओर कैनवास पर कला के रंग भी सज रहे थे। शनिवार को श्री संकटमोचन संगीत समारोह में बजरंगबली के आंगन में कला दीर्घा सजाई गई। कला दीर्घा में बाल स्वरूप से लेकर लंका दहन करते हनुमान जी के स्वरूप दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। कला दीर्घा में 250 तस्वीरों में रुद्रावतार की झांकियां हर किसी को मोह रही थीं।

शनिवार को कला दीर्घा का उद्घाटन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र, प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ला और डॉ. विंध्याचल यादव ने उद्घाटन किया। कला दीर्घा में हनुमान जी के देश के विभिन्न राज्यों से कलाप्रेमियों की करीब ढाई सौ कलाकृतियां लगाई गई हैं। इसमें चित्रकला, मूर्तिकला, फोटोग्राफी की कला के दर्शन हो रहे हैं।

उद्घाटन सत्र में महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कलाकारों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हनुमान जी के विभिन्न लीलाओं की कलाकृतियां रामचरित मानस को मानस पटल पर जीवंत कर रही हैं। संगीत समारोह में संगीत से भगवान को रिझाने और कलादीर्घा में भगवान के विभिन्न स्वरूपों का दर्शन हो रहा है। कला दीर्घा के समन्वयक प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि कलाकारों की दस दिन की कड़ी मेहनत का परिणाम है।

कला दीर्घा को कलाकार अनिल शर्मा की देखरेख में सजाया गया है। इसमें प्रदीप कुमार, उदय पॉल, शिव पॉल, प्रवीण पटेल, योगेश, इंद्रनील, अभिनव, राहुल बाबा, मानती शर्मा, कुसुम और अंकिता जायसवाल ने सहयोग किया।
