सारनाथ में बाबू जगत सिंह ने कराया पहला उत्खनन – पी बी सिंह

टूरिस्ट गाइड और फैसिलिटेटरों ने लिया बढ़ चढ़कर हिस्सा

वाराणसी, सन्मार्ग। लहुराबीर स्थित एक तारांकित होटल के सभागार में अज्ञात का अन्वेषण सारनाथ खोज की गुत्थी विषय पर बी काशी के प्रसिद्ध विद्वान तथा बी एच यू से अवकाश प्राप्त प्रोफेसर राणा पी बी सिंह के एकल व्याख्यान का आयोजन हुआ।

अशोक मिशन एडुकेशनल सोसाइटी, टूरिस्ट गाइड एसोशिएशन, अप्रूव्ड गाइड एसोशिएशन, सारनाथ गाइड एसोशिएशन तथा इंक्रेडिबल टूरिस्ट फासिलिटेटर एसोशिएशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित उपरोक्त विषय पर विद्वान वक्ता ने पी पी टी (स्लाइड शो) के माध्यम से यह बताया की सारनाथ स्थित धर्मराजिका स्तूप के बारे कुछ नए तथ्यों का पता चला है. जिन्हें पुरातत्व विभाग को अपनी सूचना पट्टिका में शामिल करना चाहिए.सारनाथ के उत्खनित परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा प्रदर्शित सूचना पट्टिका पर धर्मराजिका स्तूप एवं बाबू जगत सिंह के संबंध में प्रस्तुत की गई अशोभनीय भ्रामक जानकारी की ओर आकृष्ट कराना चाहते हैं।

विगत कुछ वर्षों में अनेक शोध कार्यों एवं अध्यनों से यह प्रमाणित हो चुका है कि प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ के खण्डहर की सर्वप्रथम खोज करने वाले बाबू जगत सिंह के बारे मे गलत जानकारी प्रस्तुत कर अंग्रेजों ने उनका श्रेय अपने नाम कर लिया और दुर्भावनापूर्ण तरीके से बनारस में अंग्रेजों के खिलाफ़ विद्रोह् का बिगुल फूंकने वाले नायक को एक विध्वंशकारी खलनायक के रूप में पेश कर दिया। अब जबकि हमारे पास उपरोक्त विषय पर पर्याप्त मात्रा में प्रमाणिक साक्ष्य उपलब्ध हो चुके हैं, हमें अंग्रेजों द्वारा थोपे गए तथ्य जो वर्षों से हमें आत्मग्लानि एवं शर्मसार होने का बोध करता रहा है को यथाशीघ्र विस्मृत कर अपने गौरवशाली स्वर्णिम इतिहास को अपना लेना चाहिए। सभा में अखिलेश कुमार, जैनेंद्र कुमार राय, राजेश्र्व सिंह, राजेंद्र पाण्डे तथा विक्रम मेहरोत्रा अपने अपने प्रमुख सदस्यों के साथ मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन किया अशोक आनंद तथा धन्यवाद ज्ञापन किया मेजर अरविंद सिंह ने।

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