वाराणसी। काशीवासी आज अपना सांसद चुनने के लिए मतदान कर रहे हैं। उधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी से लगभग ढाई हजार किलोमीटर दूर कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक के ध्यान मंडपम में 45 घंटे की साधना में लीन हो गए हैं। पीएम मोदी उसी स्थान पर ध्यान में बैठे हैं, जहां स्वामी विवेकानंद ने आज से 142 साल पहले ध्यान लगाया था। पीएम इसके जरिये संभवतः संदेश देना चाहते हैं कि राजनीति से इतर आध्यात्म का भी उनके जीवन में बहुत महत्व है। संभवतः इससे ही उन्हें 18 घंटे काम करने और देश की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। एक्सपर्ट्स की मानें तो ध्यान को उद्देश्य प्राप्ति का भी अचूक फार्मूला भी माना जाता है। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आखिरी चरण के मतदान से पहले 30 मई को कन्याकुमारी पहुंच गए। पीएम साधना में लीन हो गए हैं। प्रधानमंत्री की गेरुआ वस्त्र धारण किए ध्यान में लीन तस्वीरें सामने आ रही हैं। मोदी भी विवेकानंद की तरह तीन दिन यानी 45 घंटे ध्यान में रहेंगे। मोदी चुनावी दौर में भले ही ध्यान के जरिये देशवासियों को संदेश देना चाहते हैं, लेकिन विपक्षी दल इसको लेकर कटाक्ष कर रहे हैं। तमिलनाडु कांग्रेस इसको लेकर कोर्ट में भी पहुंच गई है। 

सनातनियों के लिए आस्था का केंद्र है कन्याकुमारी 
कन्याकुमारी तीर्थ सनातन परंपरा को मामने वालों के लिए आस्था का केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि यहां देवी सती का पृष्ठ भाग गिरा था। इसलिए इसे प्रमुख शक्तिपीठ भी माना जाता है। देवी कन्याकुमारी ने भी यहां तपस्या की थी। यहां की साधना का परिणाम तुरंत मिलता है। 

2019 के लोकसभा चुनाव में आए थे बेहतर परिणाम 
प्रधानमंत्री मोदी 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भी केदारनाथ गुफा में ध्यान में बैठे थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव के बेहतर परिणाम सामने आए थे। इस बार पीएम लोकसभा चुनाव की काउंटिंग से तीन दिन पहले कन्याकुमारी में ध्यान में बैठे हैं। प्रधानमंत्री भारत की प्राचीन ध्यान परंपरा को दुनिया भर में फैलाने के हिमायती हैं। उन्होंने इसको लेकर पूरी दुनिया को संदेश देने की कोशिश की है। कोरोना काल में ध्यान व योग उपचार व दवाइयों से कारगर रहा।

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