फारवर्ड एरिया में लोगों की आवाजाही बढ़ाने के लिए भारतीय सेना का प्लान

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में टूरिजम में तेजी लाने और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास तक, फॉरवर्ड एरिया में लोगों की आवाजाही बढ़ाने के लिए भारतीय सेना ने सीमा दर्शन प्लान बनाया है, जिस पर काम हो रहा है। गृह मंत्रालय को भारतीय सेना ने यह प्रस्ताव दिया था, जिसमें कहा गया था कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर की तरफ टूरिस्ट जाते हैं, लेकिन बाकी अरुणाचल में टूरिस्टों की संख्या कम है। यहां किबिथु के पास एलएसी के नजदीक तक जाने का प्रस्ताव ‘वेलॉन्ग टू वाचा’ दिया गया। जरूरी इजाजत लेने के बाद यहां टूरिस्ट उस बॉर्डर पर्सनेल मीटिंग पॉइंट यानी बीपीएम पॉइंट तक भी जा सकते हैं, जहां भारत और चीन के मिलिट्री अफसरों की मीटिंग होती है। ये बीपीएम पॉइंट किबिथु से करीब 7 किलोमीटर आगे वाचा में हैं। यह एलएसी के एकदम पास है। 1962 की जंग में चीनी सैनिक वेलॉन्ग तक आ गए थे और भारतीय सैनिकों ने बहादुरी से यह जंग लड़ी। वेलॉन्ग में वॉर मेमोरियल है और यहां लाइट ऐंड साउंड शो भी शुरू किया गया है। इसमें वेलॉन्ग की लड़ाई और भारतीय सैनिकों की वीरता को बेहद रोमांचक तरीके से दिखाया जाता है। यहां भी टूरिस्टों को आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वेलॉन्ग जाने के रास्ते में लोहित नदी पर परशुराम कुंड है। यह धार्मिक लिहाज से अहम माना जाता है। मान्यता है कि जब भगवान परशुराम ने पिता के कहने पर मां का सिर फरसे से अलग कर दिया था तो फरसा उनके हाथ से चिपक गया था। फिर मातृहत्या के दोष से मुक्ति के लिए वह लोहित नदी के पानी से हाथ धोने आए, जिसके बाद उनके हाथ से फरसा अलग हुआ। परशुराम कुंड पर मकर संक्रांति के दिन मेला लगता है, जहां नेपाल से भी काफी लोग आते हैं।
अरुणाचल प्रदेश में सीमा दर्शन कार्यक्रम के तहत धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के साथ ही एडवेंचर और मिलिट्री टूरिजम को भी प्रमोट किया जा रहा है। कुछ समय में यहां फॉरवर्ड एरिया में इंडस्ट्रियलिस्ट, टूर ऑपरेटर्स असोसिएशन, आईआरएस अफसरों के साथ ही अलग-अलग स्कूल और कॉलेज के बच्चों के लिए भी टूर किए गए। तवांग सेक्टर को छोड़कर बाकी अरुणाचल प्रदेश में ही 12 टूरिस्ट सर्किट को प्रमोट किया जा रहा है और यहां 2 फॉरेन टूरिस्ट सर्किट भी अप्रूव हैं। टाक्सिंग गोम्पा, सहित कई लेक और पास (दर्रे) तक जाने के लिए भी पर्यटकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। भारत सरकार एलएसी के पास टूरिस्टों की मौजूदगी बढ़ा रहा है, जिससे उन सभी जगहों पर भारत का दावा और पुख्ता हो सके। उन जगहों पर टूरिस्टों की आवाजाही से चीन के दावे की हवा भी निकलेगी। सेना ने अरुणाचल से लेकर सिक्किम और काराकोरम पास तक अलग-अलग एडवेंचर अभियान शुरू किए हैं।

यह सिलसिला कुछ साल पहले शुरू हुआ और अब इसमें तेजी आई है। साल 2018 में गृह मंत्रालय ने लद्दाख में 5 नए रूट को टूरिस्ट और 4 ट्रेल ट्रैकिंग के लिए खोले थे। अगले साल रक्षा मंत्रालय ने दुनिया के सबसे ऊंचे बैटल फील्ड सियाचिन को टूरिस्टों के लिए खोल दिया। टूरिस्ट अब बेस कैंप से कुमार पोस्ट तक जा सकते हैं।

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