भारत ने 1971 वॉर के बाद बड़ा मौका गंवा दिया

चंडीगढ़। पटियाला की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने सिख वोटरों के नब्ज पर हाथ रखने की कोशिश की। उन्होंने रैली में करतारपुर कॉरिडोर को भारत में नहीं होने पर अफसोस जाहिर किया। पीएम मोदी ने लोगों को याद दिलाई कि अगर 1971 के युद्ध में विजयी होने के बाद तत्कालीन कांग्रेस की सरकार मोलतोल करती तो करतारपुर साहिब भारत का हिस्सा होता। उन्होंने कहा कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में 90 हजार से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। अगर उस दौर में वह सत्ता में होते तो पाकिस्तानी सैनिकों की रिहाई से पहले करतारपुर साहिब ले लेते।

पाकिस्तानी सेना के जुल्मों से तंग आकर 1970 की शुरुआत में ही पूर्वी पाकिस्तान के शरणार्थी भारत में आने लगे थे। इस बीच अलग बांग्लादेश की मांग को लेकर आवामी लीग नेता शेख मुजीबुर्रहमान की मुक्तिवाहिनी ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

शरणार्थियों की बढ़ती संख्या के बाद भारत ने इसमें हस्तक्षेप किया और पाकिस्तान ने युद्ध की घोषणा कर दी। दिसंबर 1971 में 13 दिनों तक संघर्ष चला। भारतीय सेना ने 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों और रजाकारों को सरेंडर करने के लिए बाध्य किया। 16 दिसंबर को जनरल नियाजी ने सरेंडर पत्र पर दस्तखत किए और नया बांग्लादेश के जन्म के साथ ही पाकिस्तानी सैनिकों की रिहाई शुरु हो गई।

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