वाराणसी, सन्मार्ग। श्री हनुमान ध्वजा प्रभात फेरी समिति के तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय यात्रा की अंतिम कड़ी में मंगलवार को हनुमान जन्म उत्सव के अवसर पर भव्य ध्वजा प्रभात फेरी निकाली गई। कौशल शर्मा के नेतृत्व में 15 दिनों तक लगातार हनुमान पूजा यात्रा निकली। हनुमान जयंती पर ध्वज यात्रा धर्म संघ दुर्गाकुंड से निकलकर विभिन्न मार्ग होते हुए संकटमोचन पहुंची। इस दौरान फूलों से संकटमोचन की भव्य पालकी झांकी के दर्शन को भक्त उमड़े।

श्री हनुमान ध्वज प्रभात फेरी में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय शामिल हुए। संकट मोचन पालकी यात्रा को कंधा देकर मंदिर तक गए। इसी क्रम में सर्वप्रथम गणेश जी, शंकर जी, संकट मोचन की पालकी में फूलों से भव्य झांकी सजाई गई। मथुरा के गौ भक्त शास्त्री जी प्रभु की पूजन अर्चन कर भक्तों को ध्वजा देकर यात्रा की शुभारंभ की। इसमें भक्तों का रेला उमड़ा। यात्रा में संकट मोचन रूपी रथ की भव्य झांकी के साथ भक्तों के कंधे पर पालकी में गणेश जी, हनुमान जी व शंकर जी की भव्य झांकी चल रही थी। यात्रा का मुख्य आकर्षण 21 फुट ऊंची पताका भी रही, जिस पर हनुमान जी का स्वरूप बना था।

प्रभातफेरी में 1100 केसरिया ध्वज समेत 21 डमरू वादक संग बग्घी पर रामदरबार, शिव ताण्डव व गंगा की झांकी मनोहारी रही। भक्तों ने 1100 केशरिया ध्वजा लहराई। प्रभात फेरी संकट मोचन पहुंची, जहां जहां प्रभु के चरणों में ध्वजा अर्पित की गई। सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और राम दरबार की बैठकी हुई। संकटमोचन मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ मिश्रा ने प्रभु की आरती उतारी और 21 कुंतल प्रसाद प्रभु को चढ़ाया गया। भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में अध्यक्ष कौशल शर्मा, अरविंद जैन, मनीष गिनोडिया, विश्वनाथ पोद्दार, सुरेश तुलस्यान लोकेश अग्रवाल, महेश चौधरी, कृष्ण कुमार काबरा, केशव जालान, अरविंद तुलसियान आदि मौजूद थे।

श्री संकट मोचन मंदिर में महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र एवं पुष्कर नाथ मिश्र ने भक्तों में प्रसाद वितरण किया। हनुमत जयंती के अवसर पर श्री संकट मोचन मंदिर प्रांगण में स्वर्ण प्रताप चतुर्वेदी एवं पंकज शुक्ला के आचार्यत्व में रामाचार्य पूजन एवं रुद्राभिषेक किया गया। इस अवसर पर वाल्मिकी रामायण के सुंदर कांड का पाठ राघवेंद्र पांडेय ने किया। अखंड रामचरित मानस का चैती में गायन रामकृष्ष्ण मिशन एवं अन्य कीर्तन मंडलियों द्वारा किया गया। मंदिर के कीर्तन मंडलियों द्वारा अखंड सीताराम कीर्तन का पाठ हुआ। इस अवसर पर शहनाई वादन वाराणसी के कलाकारों द्वारा किया गया।

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