कर्नाटक सरकार ने बुधवार को राज्य भर में हुक्का बारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक पारित किया, जिसमें निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के दोषी पाए जाने वालों के लिए एक से तीन साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना सहित कठोर दंड का प्रावधान है। अधिसूचना के अनुसार, अपने नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और तंबाकू से संबंधित बीमारियों की लहर को रोकने के लिए मौजूदा सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए) में संशोधन के बाद प्रतिबंध लगाया गया है।इसके अतिरिक्त, राज्य ने 21 वर्ष से कम उम्र के लोगों को सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। संशोधित विधेयक धूम्रपान मुक्त वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू उत्पादों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार ने किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। नियम का उल्लंघन करने पर 1,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। 

कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने हुक्का बार पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले के बारे में बोलते हुए कह कि यह एक निर्णय है जो सरकार ने लिया है।’ किशोरावस्था में बहुत सारे युवा इन जगहों पर पाए जाते हैं। स्वास्थ्य एवं कानून व्यवस्था के हित में सरकार ने यह निर्णय लिया है। कर्नाटक सरकार की यह कार्रवाई WHO ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे-2016-17 (GATS-2) द्वारा साझा किए गए ‘खतरनाक डेटा’ की पृष्ठभूमि पर आई है, जिसमें दावा किया गया है कि कर्नाटक में 22.8 प्रतिशत वयस्क तंबाकू का उपयोग करते हैं, जिनमें से 8.8 प्रतिशत धूम्रपान करने वाले हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य में 23.9 प्रतिशत वयस्क निष्क्रिय धूम्रपान करने वाले हैं। 

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