नई दिल्ली। चदेश ने रक्षा के क्षेत्र में एक और अहम कामयाबी हासिल की है। सामरिक बल कमान (एसएफसी) ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि प्राइम का सफल परीक्षण किया है। यह टेस्ट 3 अप्रैल को शाम 7 बजे ओडिशा के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। टेस्ट के दौरान नई पीढ़ी की मिसाइल ने अपने विश्वसनीय प्रदर्शन को बनाए रखते हुए सभी परीक्षण उद्देश्यों को पूरा किया।
इस टेस्ट को टर्मिनल प्वाइंट पर रखे गए दो डाउनरेंज जहाजों सहित विभिन्न स्थानों पर तैनात कई रेंज सेंसर के जरिये कैप्चर किए गए डेटा से पुष्टि की गई है। इस सफल लॉन्च को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड और डीआरडीओ के प्रमुख के साथ ही भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साथ देखा। इस न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल पर एमआईआरवी वॉरहेड को लगाया जा सकता है। इसकी मारक क्षमता 1000-2000 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल हाई इंटेसिटी वाले विस्फोटक, थर्मोबेरिक या न्यूक्लियर वेपन ले जाने में सक्षम हैं। मिसाइल पर 1500 से 3 हजार किलोग्राम के वॉरहेड लगाए जा सकते हैं। इस मिसाइल का वजन 11 हजार किलोग्राम है। ऐसे में यह एक साथ कई टारगेट पर निशाना साध सकती है। इस मिसाइल को जल्द ही भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा। इस मिसाइल में सॉलिड फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता है। अग्नि प्राइम टू स्टेज मिसाइल है। यह पिछले अग्नि के वर्जन से हल्की है। मालूम हो कि अग्नि 1 का परीक्षण साल 1989 में किया गया था। साल 2004 में जिस अग्नि मिसाइल को सेना में शामिल किया गया था उसकी मारक रेंज 700-900 किलोमीटर थी।

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