वाराणसी। हिन्दू विक्रम संवत 2081 नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पुण्य अवसर पर नमामि गंगे व गंगोत्री सेवा समिति ने ब्रह्ममुहूर्त में भगवान सूर्य की आरती उतारकर विधिविधानपूर्वक अर्घ्य देकर हिंदू नववर्ष का भव्य स्वागत किया।

दशाश्वमेध घाट पर सूर्यदेव के उदय होते ही दुग्ध व गंगा जल से अर्घ्य देकर प्रकृति संरक्षण, देश में अमन-चैन, साथ-साथ सनातन संस्कृति के समृद्धि की भी कामना की गई। नमामि गंगे के सदस्यों व गंगा अर्चको द्वारा षोडशोपचार विधि से हवन व पूजन करके भारतीय संस्कृति के अनादि काल से अनंतकाल तक के प्रवाह की साक्षी गंगा की अविरलता, निर्मलता और सतत प्रवाह के लिए कामना की गई। 

नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संस्कृति का अमृत गान है। नव संवत्सर हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक थाती से परिचित कराने और उसे सहेजने का भी अवसर देता है। नव संवत्सर सृष्टि का स्पंदन है। भारतीय अलौकिक संस्कृति का नया वर्ष लोक कल्याणकारी हो इसके लिए हमने प्रार्थना की है। संयोजन गंगोत्री सेवा समिति के सचिव दिनेश शंकर दुबे ने किया। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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