वाराणसी। गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने वाराणसी में कहा कि भारत के हिंदू राष्ट्र बनने पर ही विश्व का कल्याण होगा। शंकराचार्य पांच दिवसीय काशी प्रवास पर हैं। वह अपने प्रवास के पांचवें दिन मठ में श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान कर रहे थे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भारत जल्द ही हिंदू राष्ट्र हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे यहां से हिंदू राष्ट्र भारत की जय हम मान के चलते हैं। उन्होंने कहा कि गौ हत्या के लिए प्रकल्प करना चाहिए जो प्रकल्प अंदर से चल रहा है।

राजनेता समझे राजनीति की परिभाषा 

राजनेताओं को राजनीति की सही परिभाषा जाननी चाहिए। राजनेताओं की कमी नहीं है लेकिन वे राजनीति की परिभाषा से भी परिचित नहीं हैं। सुसंस्कृत, सुव्यवस्थित, सुरक्षित, समृद्ध व्यक्ति व समाज की रचना, राजनीति की परिभाषा है। राजनीति उन्माद व सत्ता लोलुपता का नाम नहीं है।

धार्मिक क्षेत्र न बने पर्यटन केन्द्र 

शंकराचार्य ने कहा कि किसी धार्मिक क्षेत्र को पर्यटन केंद्र नहीं बनाया जाता। उन्होंने कहा कि काशी को भी जिस तरह से पर्यटन केंद्र बनाया जा रहा है, काशी काशी नहीं रह जाएगी। उन्होंने कहा कि आज के समय में जनता भी तपोस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में देखना चाहती है। लोगों को इस पर सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं उदाहरण के तौर पर बताना चाहता हूं कि मेरे बाद का प्रभाव जैनों पर पड़ गया। उन्होंने कहा कि पारसनाथ को पर्यटन केंद्र घोषित किया गया जिसका उन्होंने बड़ा विरोध किया अंत में शासन को अपना फैसला वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि जैन बुद्धिमान निकले।

शास्त्रीय मर्यादा का न हो उल्लंघन
शंकराचार्य ने अयोध्या पर किए गए प्रश्न पर कहा कि मैंने बोला था कि अयोध्या में रामलला प्रतिष्ठित हो रहे हैं। 500 वर्षों से जो काम रुका था वह हो रहा है, अच्छी बात है। लेकिन शास्त्रीय मर्यादा का उल्लंघन भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनके द्वारा प्रतिष्ठित होना आवश्यक हो उनके द्वारा प्रतिष्ठित होना चाहिए। अगर प्रधानमंत्री रामलला को सेकुलर के रूप के रूप में सिद्ध करना चाहते हैं यह उचित नहीं है।

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